छत्तीसगढ़

“15 दिन बाद भी जांच का अता-पता नहीं!”बैजलपुर पंचायत में ₹76,350 के भुगतान पर शिकायत, कार्रवाई की पारदर्शिता पर सवाल

15 दिन बाद भी जांच का अता-पता नहीं! बैजलपुर पंचायत में 15वें वित्त की राशि पर शिकायत, कार्रवाई की पारदर्शिता पर सवाल

15 वाट के बल्ब को ही बोलते है स्ट्रीट लाइट

“15वें वित्त की राशि पर सवाल, 15 दिन से जांच का इंतजार; कथित लेन-देन की चर्चा ने बढ़ाई बेचैनी”

बलौदा। ग्राम पंचायत बैजलपुर में 15वें वित्त आयोग की राशि के कथित दुरुपयोग को लेकर की गई शिकायत पर 15 दिन बीत जाने के बाद भी जांच पूरी नहीं होने से प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। शिकायतकर्ता शुभम् सिंह राजपूत, विधायक प्रतिनिधि, जांजगीर-चांपा ने अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) एवं विहित प्राधिकारी, अकलतरा के समक्ष शिकायत प्रस्तुत कर ग्राम पंचायत के सरपंच एवं सचिव पर शासकीय राशि के कथित दुरुपयोग का आरोप लगाया था।

“शिकायत हुई, जांच का दावा हुआ… लेकिन रिपोर्ट कहां? बैजलपुर पंचायत मामले में 15 दिन बाद भी शिकायतकर्ता अनजान”

शिकायत में eGramSwaraj पोर्टल के अभिलेखों का हवाला देते हुए दो भुगतानों पर आपत्ति दर्ज कराई गई है। शिकायतकर्ता के अनुसार वाउचर क्रमांक XVFC/2026-27/P/1, दिनांक 20 अप्रैल 2026 के माध्यम से हैंडपंप मरम्मत के नाम पर ₹45,579 तथा वाउचर क्रमांक XVFC/2026-27/P/7, दिनांक 4 मई 2026 के माध्यम से स्ट्रीट लाइट मरम्मत के नाम पर ₹30,771 का भुगतान किया गया। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि उक्त भुगतान सरपंच के परिवार से संबंधित व्यक्ति के नाम पर किया गया तथा मौके पर संबंधित कार्य नहीं होने की बात कही गई है।

शिकायतकर्ता ने मामले की निष्पक्ष जांच के साथ संबंधित वेंडर का नाम, बैंक खाता विवरण, बिल-वाउचर, भुगतान संबंधी अभिलेख तथा कार्यस्थल का भौतिक सत्यापन कराए जाने की मांग की थी। साथ ही दोष सिद्ध होने की स्थिति में छत्तीसगढ़ पंचायती राज अधिनियम के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की मांग की गई थी।

15 दिन बाद भी शिकायतकर्ता को जांच की स्थिति की जानकारी नहीं

शिकायतकर्ता का कहना है कि शिकायत प्रस्तुत किए जाने के बाद जांच के लिए 15 दिन का समय बीत चुका है, लेकिन अब तक उसे जांच की प्रगति, जांच अधिकारी अथवा जांच के निष्कर्ष के संबंध में कोई आधिकारिक सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई है। इससे शिकायतकर्ता ने जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं।

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि “प्रशासनिक स्तर पर शिकायतकर्ता को जानकारी से दूर रखा जा रहा है और ऐसा प्रतीत हो रहा है कि मामले की जांच को लेकर पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है।” वहीं, शिकायतकर्ता को कथित रूप से यह जानकारी भी मिली है कि संबंधित पक्षों के बीच आपसी लेन-देन के माध्यम से मामले को समाप्त किए जाने का प्रयास किया गया है। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

निष्पक्ष जांच और जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग

शिकायतकर्ता ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की जांच किसी निष्पक्ष अधिकारी से कराई जाए तथा भुगतान से संबंधित मूल अभिलेख, बैंक लेन-देन, बिल-वाउचर और eGramSwaraj रिकॉर्ड का मिलान कराया जाए। साथ ही मौके पर भौतिक सत्यापन कराकर जांच रिपोर्ट तैयार की जाए और शिकायतकर्ता को जांच की स्थिति एवं निष्कर्ष की आधिकारिक जानकारी दी जाए।

मामले में प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी। अब देखना यह है कि प्रशासन शिकायत पर निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाता है या जांच की प्रक्रिया पर उठ रहे सवाल आगे भी बने रहते हैं।

Related Articles

Back to top button