विपक्षी जनप्रतिनिधियों के साथ भेदभाव का आरोप, मुख्यमंत्री साय के सामने कांग्रेस ने उठाया निधि आवंटन का मुद्दा

शिवरीनारायण में राजेश अग्रवाल के नेतृत्व में कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल की मुख्यमंत्री से मुलाकात; जिला पंचायत सदस्यों के हाउस अरेस्ट पर भी जताई आपत्ति, जांच का मिला आश्वासन
जांजगीर-चांपा। छत्तीसगढ़ की राजनीति में जनप्रतिनिधियों की निधि को लेकर सियासी टकराव तेज होता नजर आ रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के शिवरीनारायण प्रवास के दौरान जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राजेश अग्रवाल के नेतृत्व में कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात कर शासन-प्रशासन पर विपक्षी जनप्रतिनिधियों के साथ कथित भेदभाव और मनमानी के गंभीर आरोप लगाए।

प्रतिनिधिमंडल में विधायक व्यास कश्यप, विधायक शेषराज हरबंश, जिला पंचायत के पूर्व उपाध्यक्ष राघवेन्द्र प्रताप सिंह तथा ब्लॉक कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष नवल सिंह ठाकुर शामिल रहे।
‘सरपंच से विधायक तक के अधिकारों पर सवाल’
कांग्रेस जिलाध्यक्ष राजेश अग्रवाल ने मुख्यमंत्री के समक्ष आरोप लगाया कि वर्ष 2023 में भाजपा सरकार बनने के बाद जिले में विपक्षी जनप्रतिनिधियों की निधि के आवंटन में पक्षपात किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को विकास कार्यों के लिए समान अवसर मिलना चाहिए, लेकिन वर्तमान व्यवस्था में कथित तौर पर ‘तेरा-मेरा’ की राजनीति दिखाई दे रही है।
अग्रवाल ने कहा कि जिले और राज्य के गठन के बाद पूर्ववर्ती सरकारों के दौरान विपक्षी जनप्रतिनिधियों के साथ इस तरह के भेदभाव की स्थिति नहीं थी। उन्होंने शासन के मंत्रियों से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए और निधि आवंटन की प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग की।
जिला पंचायत सदस्यों के हाउस अरेस्ट पर भी सवाल
प्रतिनिधिमंडल ने जिला पंचायत सदस्यों को कथित तौर पर हाउस अरेस्ट किए जाने की कार्रवाई पर भी आपत्ति जताई। कांग्रेस नेताओं ने इसे अनुचित और दमनात्मक बताते हुए निर्वाचित प्रतिनिधियों के लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान सुनिश्चित करने की मांग रखी।
मुख्यमंत्री के आश्वासन पर टिकी निगाहें
कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल के अनुसार, चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मामले की अपने स्तर पर जांच कराने तथा निधि आवंटन में विपक्षी जनप्रतिनिधियों को समान अधिकार देने की बात कही।
अब बड़ा सवाल यह है कि निधि आवंटन में कथित भेदभाव के आरोपों की जांच में क्या सामने आता है और क्या विपक्षी जनप्रतिनिधियों को विकास कार्यों के लिए समान अवसर मिल पाएंगे? फिलहाल, इस पूरे मामले में जांच और आगे की प्रशासनिक कार्रवाई पर निगाहें टिकी हैं।




