छत्तीसगढ़

स्कूल प्रबंधन पर वादाखिलाफी का आरोप, 25 साल पुरानी फीस रियायत समाप्त करने का विरोध

25 साल पुरानी फीस रियायत खत्म करने पर ग्रामीणों में आक्रोश, हसदेव पब्लिक स्कूल प्रबंधन पर वादाखिलाफी का आरोप

लछनपुर। ग्राम लछनपुर में संचालित हसदेव पब्लिक स्कूल एक बार फिर विवादों में घिरता नजर आ रहा है। ग्रामीणों ने स्कूल प्रबंधन पर स्थापना काल में किए गए वादे से मुकरने का आरोप लगाते हुए गहरी नाराजगी जताई है। ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल की स्थापना के समय ग्राम के बच्चों को शिक्षा शुल्क में 50 प्रतिशत रियायत देने का आश्वासन दिया गया था, जिसका लाभ वर्षों तक मिलता रहा, लेकिन अब वर्ष 2026 में इस सुविधा को समाप्त करने का प्रयास किया जा रहा है।

ग्रामीणों के अनुसार लगभग वर्ष 2000 में जब स्कूल की स्थापना हुई थी, तब ग्रामवासियों के सहयोग और सहमति के बदले यह व्यवस्था बनाई गई थी कि ग्राम लछनपुर के विद्यार्थियों को फीस में 50 प्रतिशत छूट दी जाएगी। यही कारण रहा कि बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने अपने बच्चों को स्कूल में प्रवेश दिलाया और वर्षों तक यह व्यवस्था सुचारू रूप से चलती रही।

ग्रामीणों का आरोप है कि वर्ष 2025 तक विद्यार्थियों को इस सुविधा का लाभ मिलता रहा, लेकिन नए शिक्षा सत्र में स्कूल प्रबंधन ने इस रियायत को जारी रखने से इंकार कर दिया। इससे ग्रामीणों और पालकों में भारी असंतोष व्याप्त है। उनका कहना है कि यदि यह सुविधा अस्थायी थी तो इसकी जानकारी पहले ही दी जानी चाहिए थी, लेकिन 25 वर्षों तक लाभ देने के बाद अचानक इसे बंद करना कई सवाल खड़े करता है।

ग्रामीणों का कहना है कि हसदेव पब्लिक स्कूल की वर्तमान पहचान और विकास में ग्रामवासियों का भी योगदान रहा है। ऐसे में स्थानीय बच्चों को मिलने वाली सुविधा को समाप्त करना सामाजिक दायित्वों से पीछे हटने जैसा है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि स्कूल प्रबंधन द्वारा पूर्ववत व्यवस्था बहाल नहीं की गई तो वे जिला प्रशासन, शिक्षा विभाग एवं जनप्रतिनिधियों के समक्ष शिकायत दर्ज कर आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।

सरपंच ने उठाए सवाल

ग्राम पंचायत लछनपुर के सरपंच गेंद राम छोटू कुर्रे ने कहा कि स्कूल की स्थापना के समय ग्रामवासियों और प्रबंधन के बीच हुए समझौते का सम्मान किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, “ग्राम लछनपुर के बच्चों को 50 प्रतिशत फीस रियायत देने की व्यवस्था कोई नई मांग नहीं है, बल्कि वर्षों से चली आ रही व्यवस्था है। यदि स्कूल प्रबंधन ने 25 वर्षों तक इस सुविधा को जारी रखा है, तो यह स्पष्ट है कि यह ग्रामवासियों से किया गया एक वादा था। आज अचानक इसे समाप्त करना उचित नहीं है। ग्राम पंचायत इस मामले में ग्रामीणों के साथ खड़ी है और आवश्यकता पड़ने पर प्रशासन के समक्ष मामला उठाया जाएगा।”

पालकों ने जताई चिंता

ग्राम लछनपुर के पालक केदार कुंभकार ने कहा कि फीस रियायत समाप्त होने से सबसे अधिक प्रभाव गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों पर पड़ेगा।

उन्होंने कहा, “वर्षों से मिल रही फीस छूट को ध्यान में रखकर ग्रामीण परिवारों ने अपने बच्चों की शिक्षा की योजना बनाई थी। अब अचानक इस सुविधा को बंद कर देना पालकों के लिए आर्थिक संकट खड़ा करने जैसा है। यह केवल फीस का मामला नहीं, बल्कि ग्रामीणों के विश्वास और बच्चों के भविष्य से जुड़ा विषय है। स्कूल प्रबंधन को अपने पुराने वादे का सम्मान करते हुए पूर्ववत 50 प्रतिशत फीस छूट जारी रखनी चाहिए।”

स्कूल प्रबंधन / अध्यक्ष का वर्जन

हसदेव पब्लिक स्कूल प्रबंधन के अध्यक्ष ने कहा, “ग्राम लछनपुर के विद्यार्थियों को वर्षों तक शुल्क में रियायत दी जाती रही है। लेकिन वर्तमान समय में स्कूल के संचालन, शिक्षकों के वेतन, अधोसंरचना विकास, परिवहन, बिजली, रखरखाव एवं अन्य प्रशासनिक खर्चों में लगातार वृद्धि हुई है। इसके कारण संस्थान को हर वर्ष लाखों रुपये का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।”

उन्होंने कहा, “विद्यालय एक निजी शैक्षणिक संस्था है और इसे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा बनाए रखने के लिए आर्थिक रूप से सक्षम रहना आवश्यक है। यदि लगातार रियायत दी जाती है और विद्यालय को नुकसान होता है, तो इसकी भरपाई कौन करेगा? यह भी एक महत्वपूर्ण प्रश्न है।”

अध्यक्ष ने आगे कहा, “विद्यालय प्रबंधन ग्रामीणों की भावनाओं का सम्मान करता है और उनके सहयोग को भी स्वीकार करता है। हालांकि वर्तमान परिस्थितियों में विद्यालय के आर्थिक पक्ष को भी ध्यान में रखना आवश्यक है। इस विषय पर ग्रामीणों, पालकों और प्रबंधन के बीच संवाद के माध्यम से उचित समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा, ताकि विद्यार्थियों के हित और विद्यालय की व्यवस्था दोनों प्रभावित न हों।”

“हम ग्रामीणों के विरोधी नहीं हैं, लेकिन यदि स्कूल को लाखों रुपये का नुकसान हो रहा है तो उसकी भरपाई कौन करेगा? विद्यालय चलाने के लिए आर्थिक संतुलन भी जरूरी है।”अध्यक्ष, हसदेव पब्लिक स्कूल प्रबंधन

ग्रामीणों ने मांग की है कि स्कूल स्थापना के समय हुए समझौतों और आश्वासनों की जांच कराई जाए तथा ग्राम लछनपुर के विद्यार्थियों को पूर्ववत फीस रियायत का लाभ दिया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो वे लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।

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