43 वर्षों से पैरों में पुलिस की गोली के निशान, तब महज 14 वर्ष के थे अनिल मनवानी


चांपा गोलीकांड की दर्दनाक यादें आज भी ताजा, पुलिस की सूची में कथित अपराधी और जनता की नजर में अधिकारों के लिए संघर्षरत नागरिक; अनिल मनवानी के पास आज भी सुरक्षित हैं इलाज की पर्ची और सूची
चांपा। 24 सितंबर 1983 को चांपा में हुए गोलीकांड की यादें आज भी उन लोगों के जेहन में जिंदा हैं, जिन्होंने अपने अधिकारों और मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर आंदोलन किया था। इस ऐतिहासिक घटना के 43 वर्ष बाद भी मंजू इलेक्ट्रॉनिक्स के संचालक अनिल मनवानी के पैरों में पुलिस की गोली के निशान उस दौर की कहानी बयां करते हैं। गोलीकांड के समय अनिल मनवानी महज 14 वर्ष के थे।

बिजली, पानी और सफाई की मांग को लेकर हुआ था जनआंदोलन
वर्ष 1983 में चांपा नगर के नागरिकों ने बिजली, सफाई और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर सामूहिक जनआंदोलन किया था। 23 सितंबर को पुलिस द्वारा कुछ छात्रों एवं युवाओं को हिरासत में लिए जाने के बाद नगर में आक्रोश फैल गया। इसके विरोध में नागरिकों ने थाने का घेराव किया।
स्थिति तनावपूर्ण होने पर पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस के साथ गोलीबारी भी की। इस गोलीकांड में छात्र राजकरण दुग्गड़ की मौके पर ही मौत हो गई। लाठीचार्ज में दर्जनों लोग घायल हुए, वहीं गौरीशंकर सोनी, डॉ. मनोहर गुलाबानी और अनिल मनवानी को गोली लगी।
14 वर्ष की उम्र में झेली गोली, आज भी सुरक्षित है इलाज की पर्ची
गोलीकांड के समय अनिल मनवानी महज 14 वर्ष के थे। उनका उपचार चांपा के मिशन अस्पताल में कराया गया था। घटना की यादों को संजोए रखने के लिए उन्होंने अस्पताल की इलाज संबंधी पर्ची आज भी सुरक्षित रखी है।
इतना ही नहीं, अनिल मनवानी के पास पुलिस द्वारा नागरिकों को कथित अपराधियों के रूप में सूचीबद्ध किए जाने संबंधी दस्तावेज की प्रति भी मौजूद है। गोलीकांड से जुड़ी इस सूची में नगर के स्वतंत्रता सेनानियों, पत्रकारों, अधिवक्ताओं, व्यवसायियों, समाजसेवियों और छात्रों के नाम दर्ज होने की बात सामने आई है।
पुलिस की सूची में नाम, लेकिन गिरफ्तारी नहीं
अनिल मनवानी द्वारा उपलब्ध कराई गई सूची में उन नागरिकों के नामों का उल्लेख है, जिन्हें तत्कालीन पुलिस रिकॉर्ड में कथित अपराधियों के रूप में दर्ज किया गया था। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार सूची में शामिल लोगों की गिरफ्तारी नहीं हुई थी। लंबे समय बाद शासन द्वारा इस प्रकरण को वापस लिए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
गोलीकांड से जुड़े इन दस्तावेजों का ऐतिहासिक महत्व है, क्योंकि इनके माध्यम से उस समय के जनआंदोलन, पुलिस कार्रवाई और नागरिकों की भूमिका से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आती हैं।
43 साल बाद भी आंखों के सामने घूम जाता है घटनाक्रम
गोलीकांड की घटना को याद करते हुए अनिल मनवानी बताते हैं कि वर्ष 1983 में वे कक्षा 11वीं के छात्र थे और थाने के सामने उमड़ी भीड़ का हिस्सा थे। उस दिन का घटनाक्रम आज भी उनकी स्मृतियों में ताजा है।
उन्होंने बताया कि जब भी चांपा गोलीकांड की चर्चा होती है, तो उस समय का पूरा दृश्य उनकी आंखों के सामने धुंधली तस्वीर की तरह उभरने लगता है।
चांपा गोलीकांड की यह घटना आज भी नगर के इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय है। अनिल मनवानी के पास सुरक्षित इलाज की पर्ची और पुलिस सूची जैसे दस्तावेज उस दौर की घटनाओं को समझने के लिए महत्वपूर्ण ऐतिहासिक साक्ष्य के रूप में सामने आए हैं।



