खाकी पर दाग या दागियों पर कार्रवाई?


250 बोरी चावल प्रकरण में करही पुलिस पर वसूली का आरोप, अब सीएसपी करेंगी जांच
जांजगीर-चांपा/बिर्रा। करही पुलिस सहायता केंद्र के प्रभारी एएसआई रामप्रसाद बघेल पर 250 बोरी चावल से जुड़े मामले में कथित अवैध वसूली के गंभीर आरोप लगने के बाद पुलिस विभाग हरकत में आ गया है। शिकायत और मीडिया में मामला प्रमुखता से सामने आने के बाद पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पांडेय ने मामले की जांच सीएसपी योगिताबली खापर्डे को सौंप दी है। अब पूरे जिले की निगाहें इस जांच पर टिकी हुई हैं।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार ग्राम झरप निवासी भुवन बंजारे अपने वाहन में लगभग 250 बोरी चावल का परिवहन कर रहा था। आरोप है कि करही पुलिस सहायता केंद्र की पेट्रोलिंग टीम ने वाहन को रोककर बड़ी कार्रवाई और जब्ती की चेतावनी दी। शिकायतकर्ता का दावा है कि कार्रवाई से बचाने के नाम पर पहले दो लाख रुपये की मांग की गई और बाद में कथित रूप से 50 हजार रुपये लेकर वाहन छोड़ दिया गया।
मामले की खबर सामने आते ही क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गई। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि पुलिस के भय और दबाव में उसे राशि देने के लिए मजबूर होना पड़ा।
मीडिया में खुलासे के बाद विभाग सक्रिय
मामले को लेकर समाचार प्रकाशित होने के बाद पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पांडेय ने इसे गंभीरता से लिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार पूरे प्रकरण की जांच के लिए सीएसपी योगिताबली खापर्डे को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
पीड़ित के बयान पर टिकी कार्रवाई
सूत्रों के अनुसार यदि शिकायतकर्ता अपने बयान में वसूली और लेन-देन के आरोपों की पुष्टि करता है तथा पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत करता है, तो संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। वहीं यदि आरोप सिद्ध नहीं होते हैं तो मामला अलग दिशा भी ले सकता है।
पहले भी विवादों में रहा नाम
करही सहायता केंद्र प्रभारी रामप्रसाद बघेल का नाम इससे पहले भी कथित वसूली और विवादित मामलों में सामने आ चुका है। क्षेत्र में चर्चा है कि पूर्व में भी उनके खिलाफ शिकायतें हुई थीं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई। यही वजह है कि इस बार लोग जांच के नतीजे का इंतजार कर रहे हैं।
एएसआई ने आरोपों को बताया निराधार
एएसआई रामप्रसाद बघेल ने सभी आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा है कि उनके द्वारा किसी प्रकार की अवैध वसूली नहीं की गई है। उनका कहना है कि यदि कोई व्यक्ति झूठे आरोप लगाकर उनकी छवि खराब करने का प्रयास कर रहा है तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
अब उठ रहे हैं बड़े सवाल
- क्या 250 बोरी चावल मामले में वाकई अवैध वसूली हुई थी?
- यदि वाहन संदिग्ध था तो विधिवत जब्ती और प्रकरण दर्ज क्यों नहीं किया गया?
- शिकायतकर्ता के आरोपों में कितनी सच्चाई है?
- क्या जांच निष्पक्ष और पारदर्शी होगी?
- यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो क्या जिम्मेदारों पर कठोर कार्रवाई होगी?
जांच रिपोर्ट का इंतजार
फिलहाल मामला जांच के अधीन है। लेकिन एक बात तय है कि इस प्रकरण ने पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली और जवाबदेही को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सीएसपी की जांच रिपोर्ट ही तय करेगी कि आरोपों में कितना दम है और खाकी पर लगे इस कथित दाग की सच्चाई क्या है।




