चांपा थाना फिर सवालों के घेरे में: कस्टोडियल डेथ के बाद CCTV से खुलेगा राज?


कस्टोडियल डेथ पर उबाल: CCTV फुटेज जब्ती और FIR की मांग तेज
अविश दास महंत मारपीट कांड की पुरानी शिकायत ने बढ़ाए सवाल, आरक्षक ईश्वरी राठौर के निलंबन के बाद उठ रही निष्पक्ष जांच की मांग
जांजगीर-चांपा/चांपा। चांपा थाना परिसर में मेहंदीपारा निवासी शिव सहिस की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। गुरुवार को थाने के घेराव के बाद अब परिजन, ग्रामीण और सामाजिक कार्यकर्ता केवल निलंबन की कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हैं। उनकी मांग है कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच हो, थाने के CCTV फुटेज तत्काल सुरक्षित कर जब्त किए जाएं और जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज की जाए।

पुरानी शिकायत ने बढ़ाई पुलिस की मुश्किलें
मामले में सामाजिक कार्यकर्ता विकास शर्मा ने दावा किया है कि चांपा थाने में पुलिसकर्मियों द्वारा कथित मारपीट और अवैध वसूली को लेकर उन्होंने पहले ही शिकायत की थी। उनके मुताबिक, 1 सितंबर की रात संजय नगर निवासी अविश दास महंत को पुलिसकर्मियों द्वारा थाने ले जाकर मारपीट किए जाने के संबंध में उन्होंने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई थी।
शिकायत क्रमांक WP260900175716 का हवाला देते हुए शर्मा ने कहा कि शिकायत में कथित कस्टोडियल वायलेंस, जुआ प्रकरण में अवैध लेनदेन तथा थाना परिसर के CCTV फुटेज सुरक्षित रखने की मांग की गई थी।
उनका आरोप है कि यदि उस समय शिकायत को गंभीरता से लेकर प्रभावी कार्रवाई की जाती तो संभवतः मौजूदा घटना की नौबत नहीं आती।


CCTV फुटेज बनेगा जांच का अहम आधार
शिव सहिस की मौत के बाद अब थाना चांपा के CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग को लेकर सबसे ज्यादा सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की मांग है कि 1 सितंबर से लेकर शिव सहिस की मौत वाले दिन तक थाना परिसर, मुख्य द्वार, लॉकअप, बैरक और अन्य संबंधित स्थानों के CCTV फुटेज सुरक्षित कराए जाएं।
मांग है कि फुटेज किसी स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच प्रक्रिया के तहत कब्जे में लेकर उसकी जांच की जाए, ताकि घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति सामने आ सके और किसी भी संभावित साक्ष्य से छेड़छाड़ की आशंका समाप्त हो।
निलंबन से नहीं थम रहे सवाल
आरक्षक ईश्वरी राठौर के निलंबन के बाद भी मामला शांत नहीं हुआ है। ग्रामीणों का सवाल है कि यदि प्रथम दृष्टया गंभीर आरोप सामने आए हैं, तो केवल विभागीय निलंबन तक कार्रवाई सीमित क्यों है? कस्टडी में कथित मारपीट और उसके बाद हुई मौत के पूरे घटनाक्रम में आपराधिक जिम्मेदारी तय कर FIR दर्ज करने की मांग भी जोर पकड़ रही है।
जांच के सामने प्रमुख सवाल
- अविश दास महंत से संबंधित पूर्व शिकायत पर समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
- हिरासत में शिव सहिस की तबीयत बिगड़ने पर परिजनों को तत्काल सूचना दी गई थी या नहीं?
- उसे अस्पताल ले जाने की पूरी प्रक्रिया क्या थी और इसकी सूचना किस स्तर पर दर्ज की गई?
- थाना परिसर के CCTV फुटेज कितने समय तक सुरक्षित रहे और क्या उन्हें सुरक्षित कर लिया गया है?
- निलंबन के अलावा संबंधित पुलिसकर्मियों की आपराधिक भूमिका की जांच कब और किस स्तर पर होगी?
“सिर्फ निलंबन नहीं, सच्चाई सामने आनी चाहिए”
सामाजिक कार्यकर्ता विकास शर्मा का कहना है कि पूर्व शिकायत को गंभीरता से लिया जाता तो स्थिति अलग हो सकती थी। उन्होंने मांग की है कि थाना चांपा के सभी संबंधित CCTV फुटेज तत्काल सुरक्षित कराए जाएं और जांच में दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ नियमानुसार आपराधिक कार्रवाई की जाए।
अब पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और CCTV फुटेज की स्थिति पर पुलिस प्रशासन की अगली कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।



