छत्तीसगढ़

ब्यास कश्यप की अनुशंसा पर 12 विकास कार्यों को हरी झंडी, ₹1.25 करोड़ से बदलेगी गांवों की तस्वीर

खाद्यान्न भंडारण से लेकर मुक्तिधाम और चेक डेम तक होंगे निर्माण; जल संरक्षण और ग्रामीण सुविधाओं को मिलेगा बड़ा सहारा

जांजगीर-चांपा। जांजगीर-चांपा विधानसभा क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में विकास को लेकर बड़ी सौगात सामने आई है। विधायक ब्यास कश्यप की अनुशंसा पर वी.बी.जी. राम जी योजना के तहत 12 विकास कार्यों को मंजूरी मिली है। इन कार्यों के लिए कुल ₹1 करोड़ 25 लाख 21 हजार की राशि स्वीकृत की गई है।

स्वीकृति मिलने के बाद अब विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न गांवों में खाद्यान्न भंडारण भवन, मुक्तिधाम-सह-प्रतीक्षालय, शवदाहगृह और सी.सी. चेक डेम जैसे जरूरी निर्माण कार्य कराए जाएंगे। लंबे समय से बुनियादी सुविधाओं की जरूरत महसूस कर रहे ग्रामीण क्षेत्रों के लिए इसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

इन गांवों में पहुंचेंगे विकास कार्य

मरकाडीह में खाद्यान्न भंडारण संरचना के लिए ₹12.16 लाख, भैंसमुड़ी में खाद्यान्न भंडारण भवन के लिए ₹12.18 लाख तथा मुनुद में खाद्यान्न भंडारण भवन के लिए ₹12.18 लाख स्वीकृत किए गए हैं।

वहीं किरीत में मुक्तिधाम-सह-प्रतीक्षालय के लिए ₹5.86 लाख, सेंदरी में ₹5.69 लाख, केवा में शवदाहगृह-सह-प्रतीक्षालय के लिए ₹5.86 लाख, अमोरा में पैंदू तालाब के पास ₹5.86 लाख तथा पचेड़ा में लोहटा तालाब के पास ₹5.86 लाख की स्वीकृति मिली है।

चेक डेम से जल संरक्षण पर जोर

विकास कार्यों में जल संरक्षण को भी प्रमुखता दी गई है। बोड़सरा के मरकाडीह नाला में ₹19.23 लाख, गिद्धा के सेमरा खार नाला में ₹8.94 लाख, गौद के गाड़ा घाट नाला में ₹16.90 लाख तथा दहिदा के हड़हा नाला में ₹14.49 लाख की लागत से सी.सी. चेक डेम का निर्माण किया जाएगा।

इन चेक डेम से बारिश के पानी को रोकने, भू-जल स्तर बढ़ाने और कृषि कार्यों के लिए पानी की उपलब्धता बेहतर करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

ग्रामीण जरूरतों पर फोकस

विधायक ब्यास कश्यप ने कहा कि गांवों में मूलभूत सुविधाओं का विस्तार उनकी प्राथमिकता है। स्थानीय जरूरतों के आधार पर विकास कार्यों को स्वीकृति दिलाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनहित और ग्रामीण विकास से जुड़े कार्यों को आगे भी प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाया जाएगा।

12 विकास कार्यों को मिली इस स्वीकृति से विधानसभा क्षेत्र के संबंधित गांवों में भंडारण, सार्वजनिक सुविधाओं और जल संरक्षण के क्षेत्र में ठोस बदलाव की उम्मीद जगी है।

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