बुड़बुड़ में निर्माण कार्यों पर फिर उठे सवाल: आंगनबाड़ी भवन में भी कथित अनियमितता, ग्रामीणों ने गुणवत्ता पर जताई चिंता

11.69 लाख की आंगनबाड़ी निर्माण में भी गड़बड़ी के आरोप, बुड़बुड़ पंचायत में फिर उठे गुणवत्ता पर सवाल
कोरबा/पाली। ग्राम पंचायत बुड़बुड़ में शासकीय निर्माण कार्यों को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। डीएमएफ मद से 11.69 लाख रुपये की लागत से बन रहे नवीन आंगनबाड़ी भवन के निर्माण में भी कथित अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि भवन का निर्माण स्वीकृत प्राक्कलन (स्टीमेट) के अनुरूप नहीं किया जा रहा है, जिससे इसकी गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
ग्रामीणों के अनुसार, निर्माणाधीन भवन में चारों ओर एक-एक फीट लेंटर बाहर निकाला जाना था, लेकिन केवल सामने की ओर ही निर्धारित माप रखा गया है। भवन के अन्य तीन हिस्सों में लेंटर महज 3 से 4 इंच तक ही निकाला गया है। उनका कहना है कि इससे बारिश के दौरान दीवारों में सीपेज और नमी की समस्या उत्पन्न हो सकती है।
इसके अलावा आरोप है कि मुख्य प्रवेश द्वार पर स्टीमेट के अनुसार बनाए जाने वाला छज्जा नहीं बनाया गया है। भवन में हवा और प्राकृतिक रोशनी के लिए आवश्यक रोशनदान भी नहीं लगाए गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इससे गर्मी के मौसम में आंगनबाड़ी आने वाले छोटे बच्चों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
यह भी उल्लेखनीय है कि इसी पंचायत में डीएमएफ मद से लगभग 30.85 लाख रुपये की लागत से बने प्राथमिक-माध्यमिक शाला भवन की गुणवत्ता पर भी पहले सवाल उठ चुके हैं। ग्रामीणों का दावा है कि शिक्षा विभाग ने उस भवन को गुणवत्ता संबंधी आपत्तियों के कारण हैंडओवर लेने से भी इनकार किया था।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि पंचायत में निर्माण कार्यों में लगातार गुणवत्ता से समझौता किया जा रहा है। उनका कहना है कि शासन द्वारा निर्धारित मापदंडों का पालन नहीं होने से सरकारी राशि का दुरुपयोग हो रहा है और बच्चों की सुरक्षा भी प्रभावित हो सकती है।
कुछ ग्रामीणों ने यह भी दावा किया कि सरपंच एवं सचिव के परिजनों द्वारा अधिकारियों को प्रभावित करने जैसी बातें कही जा रही हैं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और न ही इस संबंध में संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया प्राप्त हो सकी है।
जांच की मांग
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की तकनीकी जांच कराने, निर्माण कार्य का गुणवत्ता परीक्षण कराने तथा यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है।



