छत्तीसगढ़

बरसात में बेदखली पर बवाल: अफरीद मुड़पार में वन विभाग की कार्रवाई से बेघर हुए परिवार, कलेक्टर के हस्तक्षेप के बाद रुकी कार्रवाई

जांजगीर-चांपा। जिले के बम्हनीडीह विकासखंड अंतर्गत ग्राम अफरीद मुड़पार में शनिवार को वन विभाग द्वारा वन भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई किए जाने से विवाद की स्थिति निर्मित हो गई। वन विभाग की टीम पुलिस बल एवं प्रशासनिक अधिकारियों के साथ गांव पहुंची और बुलडोजर चलाकर वन भूमि पर बने तीन मकानों सहित शौचालयों को ध्वस्त कर दिया। कार्रवाई के बाद प्रभावित परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हो गए, जबकि उनका घरेलू सामान भी बरसात के बीच खुले में पड़ा हुआ है।

जानकारी के अनुसार, विभाग ने संबंधित परिवारों को अंतिम नोटिस जारी करने के पांच दिन बाद छठवें दिन बेदखली की कार्रवाई शुरू की। कार्रवाई के दौरान कई परिवारों के आशियाने उजड़ गए, जिससे महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के सामने रहने की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई।

कलेक्टर के हस्तक्षेप से आगे की कार्रवाई पर लगी रोक

मामले की जानकारी जिला कलेक्टर तक पहुंचने के बाद उन्होंने स्थिति का संज्ञान लिया। बताया जा रहा है कि कलेक्टर के हस्तक्षेप के बाद वन विभाग ने फिलहाल शेष मकानों को तोड़ने की कार्रवाई रोक दी। हालांकि जिन मकानों को खाली कराया गया है, उनमें विभाग द्वारा ताला लगा दिया गया है। प्रभावित परिवारों का कहना है कि बरसात के बीच उन्हें रहने के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध नहीं कराई गई है।

पुनर्वास की मांग

प्रभावित ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन उन्हें वन भूमि से हटाना चाहता है तो पहले उनके पुनर्वास की व्यवस्था की जानी चाहिए। उनका आरोप है कि बिना वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराए मकान तोड़ देने से परिवारों के सामने जीवन-यापन का संकट खड़ा हो गया है।

खेल मैदान की बाउंड्रीवाल टूटने पर भी विवाद

कार्रवाई के दौरान गांव के खेल मैदान की बाउंड्रीवाल का एक हिस्सा भी तोड़ दिया गया। वन विभाग का दावा है कि बाउंड्रीवाल वन भूमि पर निर्मित थी, जबकि ग्रामीणों का कहना है कि यह मैदान वर्षों से बच्चों के खेलकूद के लिए उपयोग में है और इसी परिसर में धान खरीदी केंद्र भी संचालित होता रहा है। ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि बाउंड्रीवाल हटने से खेल मैदान की सुरक्षा और धान भंडारण व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

सरकारी नीति पर उठे सवाल

इस कार्रवाई के बाद स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठने लगे हैं कि जब सरकार बरसात के मौसम में किसी को बेघर नहीं करने और मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की बात करती है, तब इसी मौसम में बेदखली की कार्रवाई क्यों की गई। ग्रामीणों ने प्रशासन से संवेदनशील रवैया अपनाने और प्रभावित परिवारों के लिए स्थायी समाधान निकालने की मांग की है।

वहीं वन विभाग का कहना है कि यह कार्रवाई वन भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए नियमानुसार की जा रही है। दूसरी ओर, प्रभावित परिवारों और ग्रामीणों ने प्रशासन से पुनर्वास, राहत एवं न्यायसंगत समाधान उपलब्ध कराने की मांग की है।

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