छत्तीसगढ़

शासकीय दौरे के नाम पर स्कॉर्पियो का निजी उपयोग? जनपद बम्हनीडीह में उठे गंभीर सवाल

शासकीय दौरे के नाम पर वाहन का कथित दुरुपयोग, शासन को हर माह हजारों रुपये की क्षति?

बम्हनीडीह। जनपद पंचायत बम्हनीडीह में ग्राम पंचायतों के निरीक्षण एवं शासकीय दौरे के लिए अधिग्रहित की गई स्कॉर्पियो वाहन के कथित निजी उपयोग को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। जनप्रतिनिधियों एवं स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि शासकीय कार्यों के लिए उपलब्ध कराई गई वाहन का उपयोग अधिकारी के निजी आवागमन में किया जा रहा है, जिससे शासन को प्रतिमाह हजारों रुपये का आर्थिक नुकसान हो रहा है।

आरोप है कि वाहन क्रमांक CG11BG5525 से संबंधित अधिकारी प्रतिदिन अपने निवास क्षेत्र लछनपुर-चांपा से जनपद पंचायत बम्हनीडीह कार्यालय तक लगभग 50 किलोमीटर की दूरी तय करती हैं। यदि यह यात्रा शासकीय भ्रमण के बजाय निजी आवागमन की श्रेणी में आती है तो शासन को ईंधन, वाहन किराया एवं अन्य मदों में प्रतिमाह लगभग 35 हजार रुपये तक की अतिरिक्त आर्थिक क्षति हो सकती है।

अधिग्रहित वाहन के संचालन पर भी उठे सवाल

जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायतों के भ्रमण एवं विकास कार्यों की निगरानी के लिए अधिग्रहित स्कॉर्पियो वाहन का संचालन शासकीय चालक द्वारा कराया जा रहा है। जबकि सामान्यतः अधिग्रहित वाहन के साथ चालक की व्यवस्था वाहन स्वामी द्वारा की जाती है। ऐसे में वाहन किराया अलग से भुगतान किए जाने तथा चालक की व्यवस्था शासन द्वारा किए जाने से दोहरी वित्तीय भार की स्थिति निर्मित होने का आरोप लगाया जा रहा है।

वर्षों से जारी है वाहन के दुरुपयोग का आरोप

स्थानीय जनप्रतिनिधियों का कहना है कि अधिग्रहित वाहन का निजी उपयोग कोई नई बात नहीं है, बल्कि यह व्यवस्था लंबे समय से चली आ रही है। आरोप है कि ग्राम पंचायतों के निरीक्षण और शासकीय दौरे के नाम पर वाहन का उपयोग दिखाया जाता है, जबकि वास्तविक उपयोग निजी आवागमन में किया जा रहा है।

कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ से शिकायत

मामले को लेकर जनप्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन से जांच की मांग की है। बताया जा रहा है कि इस संबंध में कलेक्टर एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को शिकायत भी भेजी गई है। शिकायतकर्ताओं ने वाहन की लॉगबुक, डीजल व्यय, यात्रा विवरण एवं जीपीएस रिकॉर्ड की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाने की मांग की है।

जांच की मांग तेज

यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह शासकीय संसाधनों के दुरुपयोग, वित्तीय अनियमितता एवं सरकारी धन के अपव्यय का गंभीर मामला हो सकता है। लोगों का कहना है कि वाहन का उपयोग किस उद्देश्य से हुआ, कितने किलोमीटर शासकीय कार्य में चला और कितने किलोमीटर निजी उपयोग में, इसकी निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार व्यक्तियों पर कार्रवाई की जानी चाहिए।

जिम्मेदार अधिकारी का पक्ष

“अधिग्रहण किये गये वाहन का निजी उपयोग करना गलत है। पहले भी मैंने कहा था कि निजी उपयोग न करें। यदि ऐसा किया जा रहा है तो इसकी जांच कराई जाएगी।”
— गोकुल रावटे, मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत जांजगीर-चांपा

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