विधानसभा में गूंजा जिला चिकित्सालय जांजगीर का कथित भ्रष्टाचार, विधायक ब्यास कश्यप के सवालों पर सरकार ने गठित की 5 सदस्यीय जांच टीम

रायपुर/जांजगीर-चांपा। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन जांजगीर-चांपा जिला चिकित्सालय में कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला जोरदार तरीके से सदन में उठा। जांजगीर-चांपा विधायक ब्यास कश्यप ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से जिला चिकित्सालय में लगभग 8.80 लाख रुपये की कथित अनियमितता का मुद्दा उठाते हुए सरकार से जवाब मांगा और दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की।
विधायक कश्यप ने लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि जिला चिकित्सालय में मितानिनों एवं स्वीपरों को दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि का भुगतान लाभार्थियों के बजाय अस्पताल में पदस्थ दो कर्मचारियों के बैंक खातों में स्थानांतरित किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह पूरी प्रक्रिया योजनाबद्ध तरीके से की गई और राशि के गबन का मामला प्रतीत होता है।
उन्होंने सदन को बताया कि ई-कोष ऑनलाइन प्रणाली से तैयार भुगतान बिल पर तत्कालीन सिविल सर्जन एवं अस्पताल प्रबंधक के हस्ताक्षर हैं। बिल के अनुसार यह राशि जनवरी 2023 से वर्ष 2026 तक मितानिनों एवं स्वीपरों को दिए जाने वाले प्रोत्साहन भुगतान से संबंधित थी। विधायक ने जिला चिकित्सालय में जीवनदीप समिति की राशि में कथित अनियमितताओं तथा सिविल सर्जन कार्यालय में हुई आगजनी के मामले में अब तक ठोस कार्रवाई नहीं होने का मुद्दा भी उठाया।
विधायक ब्यास कश्यप ने आरोप लगाया कि जिला चिकित्सालय जांजगीर भ्रष्टाचार का केंद्र बन चुका है, जिससे आम जनता में शासन-प्रशासन के प्रति असंतोष और आक्रोश व्याप्त है।
मंत्री ने दी तकनीकी समस्या की दलील
ध्यानाकर्षण पर जवाब देते हुए स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि मार्च 2026 में एस.एन.ए. स्पर्श पोर्टल पर वेंडर वैलिडेशन संबंधी तकनीकी समस्या उत्पन्न हो गई थी। 28 मार्च 2026 भुगतान आहरण की अंतिम तिथि होने के कारण राशि अस्थायी रूप से अस्पताल के दो कर्मचारियों के खातों में स्थानांतरित की गई। उन्होंने बताया कि संबंधित राशि वर्तमान में जिला चिकित्सालय जांजगीर की जीवनदीप समिति के खाते में जमा है तथा मितानिनों की सूची तैयार कर भुगतान की प्रक्रिया पूरी की जा रही है।
मंत्री ने सिविल सर्जन कार्यालय में हुई आगजनी के संबंध में कहा कि घटना में कोई महत्वपूर्ण दस्तावेज नष्ट नहीं हुए और अस्पताल को प्रत्यक्ष रूप से कोई वित्तीय नुकसान नहीं पहुंचा। साथ ही उन्होंने जिला चिकित्सालय को भ्रष्टाचार का गढ़ बताए जाने के आरोपों को खारिज किया।
विधायक का पलटवार—’व्यक्तिगत खाते में राशि क्यों?’
मंत्री के जवाब से असंतुष्ट विधायक ब्यास कश्यप ने पूरक प्रश्न में पूछा कि यदि तकनीकी समस्या थी तो राशि कर्मचारियों के निजी खातों में स्थानांतरित करने की आवश्यकता क्यों पड़ी। उन्होंने सवाल उठाया कि यह राशि विभाग के अधिकृत सरकारी खाते में जमा क्यों नहीं कराई गई। विधायक ने इसे गंभीर वित्तीय अनियमितता बताते हुए संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की।
सरकार ने गठित की 5 सदस्यीय जांच समिति
स्वास्थ्य मंत्री ने सदन को जानकारी दी कि पूरे मामले की जांच के लिए प्रदेश स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों की पांच सदस्यीय जांच समिति गठित की गई है। जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
नेता प्रतिपक्ष ने भी की कार्रवाई की मांग
नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने भी विधायक ब्यास कश्यप की मांग का समर्थन करते हुए कहा कि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए संबंधित कर्मचारी को जिला चिकित्सालय जांजगीर से हटाकर अन्यत्र, विशेष रूप से बीडीएम अस्पताल चांपा में पदस्थ किया जाना चाहिए। उन्होंने भी दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग करते हुए मामले की निष्पक्ष जांच पर जोर दिया।
विधानसभा में इस मुद्दे के उठने के बाद अब सबकी नजर सरकार द्वारा गठित जांच समिति की रिपोर्ट और उसके आधार पर होने वाली कार्रवाई पर टिकी हुई है।




